ना आप मेरे बारे में जानते है न मैं आपके बारे में लेकिन फिर भी हम सभी के बिच एक रिश्ता है प्यार का। उस प्यार भरे कमेंट्स के लिए तहे दिल से शुक्रिया साथ ही साथ आप सभी को एडवांस में नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं। - आपका राज सिन्हा
मेरी कहानी तुम्ही से शुरू और तुम्ही पर खत्म होती है।
---- बेपनाह मोहब्बत - 3 ---
दीपक - मेरी गर्लफ्रेंड को पटा लो तो मैं तुम्हारा ग़ुलाम लेकिन अगर नहीं पटी तो तुम मेरे ग़ुलाम...
राज - चल हट.... वाव व्हाट ए ब्यूटी... दिल हो गया आज फ़िदा...
राज ने तीखे बोल मारे लेकिन वो खूबसूरत बला झिटक गई...।
राज - दीपक पूरा डिटेल्स पता कर....
दीपक - इस लड़की की...
राज - ये लड़की नहीं तेरी होने वाली भाभी है... कल से भाभी बोल...
दीपक - मैं कैसे पता करू..
राज - अपनी गर्लफ्रेंड से बोल वो पता करेगी.... चल ज्यादा मुँह मत खोल...।
मरता क्या नहीं करता दीपक ने अपनी फ्रेंड को जैसे तैसे मनाया और पूरा डिटेल्स सामने।
दीपक - लेकिन राज उसका एक दोस्त भी है...
राज - दोस्त ही है ना... लवर नहीं ना... चल थैंक्स...
इतना कह राज निकल गया.. अपने प्यार की तरफ।
"अजीब आदमी है यहां जब पता चलता है उसकी गर्ल फ्रेंड किसी से बात की है तो लोग उसे छोड़ देते है और ये तो दोनों साथ घूमते है।" दीपक मन ही भुनभुनाया।
उस खूबसूरत बला का नाम था नेहा और उसके दोस्त का नाम शाहिल। दोनों एक टेबल पर बैठ कर वेटर का इंतजार कर रहे थे तभी राज पहुचा और बगल की कुर्सी खिंच उन दोनों के बिच बैठ गया। वेटर आया।
राज - मेरे और मैडम दोनों के लिए चाईनीज ...।
नेहा - आपको कैसे पता की मुझे चाईनीज पसन्द है...
राज - क्या मीठी आवाज़ है ऐसे लगता है मानों गर्मी के मौसम में सुहानी हवा बह रही हो...
शाहिल - क्या मतलब ...
राज - मतलब ये कि ... आपको क्या चाहिए वेटर को बता दे बेचारा कब तक वेट करेगा।
शाहिल - ओके....
राज - आज का बिल....
शाहिल - इस एहशान की कोई जरूरत नहीं...
राज - क्या करे लोग मुझ से इतनी मोहब्बत करते है कि कोई काम मुझे करने नहीं देते..
शाहिल बिल पे किया और दोनों साथ निकल गए राज ने बाय कहा नेहा से रहा नहीं गया उसका हाथ बाय के रूप उठ गया। शाहिल गुस्से में आकर उसका हाथ निचे किया। अब दोनों में झगड़ा शुरू... जब तुम उसे नहीं जानती तो वो तुम्हारे फेवरेट डिस कैसे जानता है और उसे बाय करने की क्या ज़रूरत।
नेहा - तुम मुझ पर गुस्सा क्यों कर रहे हो...
शाहिल - क्योंकि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ...
नेहा - मैं भी....
उस झगड़े का एक फ़ायदा यह हुवा कि दोनों में प्यार का ईजहार हो गया...। लेकिन अब अक्सर राज को लेकर झगड़ा होने लगा और एक दिन दोनों ने मिलकर राज को बुलाया।
शाहिल - तुम तुम राज से मिलती हो ... राज से प्यार करती हो.... कल तुमने झूठ बोला था कि पापा घर पर आए है जबकि उस समय राज तुम्हारे घर से बाहर निकल रहा था.... तुम बेवफा... हो बेवफा...
राज - आपने सही कहा मैं इससे प्यार करता हूँ ये मुझ से प्यार करती है...
नेहा - क्या....
शाहिल - आ गई ना बात.. तुम भी इससे प्यार करती हो...
राज - आपके मुँह में घी-शक्कर..
नेहा - मैं तुमसे प्यार नहीं करती ...
राज - मैं भी तो यही कह रहा हूँ... आप नहीं करती मैं करता हूँ...
नेहा - तुम मुझ से प्यार करते हो ना...जो कहूँगी वो करोगे ना...
राज - ये भी कोई पूछने वाली बात है... जान मांगों वो भी दे दूंगा..
नेहा - मुझे तुम्हारी जान से कोई मतलब नही ...
राज - तो
नेहा - तुम हम दोनोंकी शादी कराओगे...वो भी एक सप्ताह के अंदर... क्यों उतर गया प्यार का भुत... तुम जैसे लड़को को अच्छी तरीके से जानती हूँ... सुंदर लड़की देखी नहीं की लाइन मारना चालू कर देते हो... तुम...
राज - मुझे मंजूर है.... लेकिन मेरी भी एक शर्त है कल एक दिन के लिए तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी....
नेहा - मुझे मंजूर है लेकिन शाहिल भी मेरे साथ रहेगा... और हमारी शादी के बाद तुम कभी मेरे सामने नहीं आओगे
राज - ओके
शाहिल - नॉट ओके
राज - अरे यार कल के बाद नेहा तुम्हारी....
अगले दिन नेहा का बर्थडे था राज ने बड़ी धूमधाम से मनाया .... राज ने प्यार का ईजहार गुलाब देकर किया फिर उस गुलाब को उसकी बालों में लगा दिया... साथ में डांस किए... घूमने गए पेड़ो पर दोनों ने अपना नाम लिखा लंच किए.... इत्यादि ख़ुशी.. ख़ुशी दिन बीत गया। अब राज को दोनों की शादी करवानी थी। राज ने शाहिल के पिता से बात की वो भड़क गए... और शाहिल को क़ैद कर लिया... इधर नेहा राज पर भड़क गई.... कि सब तुम्हारी चाल है तुम मुझे पाना चाहते हो ना.... केवल पाना... मर जाउंगी लेकिन तुम्हारी नहीं ... होउंगी...
राज - मत रो.... मैं तुम्हारी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकता हूँ... तुम्हारी आँखो में आसूँ... कभी नहीं .... मैं अभी शाहिल को लेकर आ रहा हूँ...।
राज उन सब से लड़ झगड़ कर शाहिल को लेकर आया..।दोनों ख़ुशी से मिले नेहा दूर खड़े राज को देखा जो दूसरी तरफ मुँह करके खड़ा था...
नेहा - खून... राज तुम्हारे हाथ से खून...
राज - ये छोटा सा जख़्म है....
दोनों डॉक्टर के पास ले गए। जब शाहिल बिल पे करने गया तो नेहा ने पूछा - सच-सच बताना ये जख़्म तुमने ख़ुद बनाए है ...सच बोलो
राज - हाँ
नेहा - क्यों...
राज - मैं तुमसे बेपनाह मोहब्बत करता हूँ और उस मोहब्बत को कोई छुए तो दर्द होता है....बहुत दर्द।
तभी शाहिल आ गया। नेहा ने उसके पापा उसे बहुत मानते है वो दोनों उससे मिलने गए...। राज को नेहा ने बाहर ही रहने को कहा और वो काजल अपनी दोस्त और साहिल के साथ अंदर गई। लगभग 1 घण्टे बाद शाहिल उदास चेहरे के साथ बाहर निकला राज के बार-बार पूछने पर बताया कि वो मुझे घरजमाई बनाना चाहते है और हमेशा के लिए माँ और घरवालों से रिश्ता तोड़ने के लिए बोल रहे है। ये कभी नहीं कर सकता... मैं अपनी माँ के बिना कभी नहीं रह सकता..
राज - आवो मेरे साथ..नेहा... नेहा..
विशम्भर - अब ये कौन है ... बड़ा भाई...
काजल - नहीं ये नेहा से प्यार करता है...
विशम्भर - दो दो आशिक.… क्या मोहब्बत है..
काजल- ये नेहा से प्यार करता है लेकिन नेहा इससे प्यार नहीं करती...
विशम्भर - आ जा मजनू इधर आ.... मेरी शर्त मंजूर है तो समझों मैं शादी करने के लिए तैयार हूँ.... अगर नहीं तो नहीं...
राज - शर्त मंजूर नहीं है... लेकिन शादी तो होगी वो भी कल इसी घर में इसी लड़की के साथ ... नेहा तुम तैयार रहना
विशम्भर - ऐ....ऐ…
राज - जो भी कहना है खुल कर कहिए आखिर आपकी बेटी की शादी है... दहेज तो हमे बिल्कुल नही चाहिए...
विशम्भर - तुम तुम ऐसा नहीं कर सकते आखिर तुम भी तो उससे प्यार मोहब्बत करते हो...
राज - हाँ हाँ.... मैं प्यार ही नहीं बहुत प्यार करता हूँ ... बेपनाह मोहब्बत करता हूँ नेहा से। लेकिन उसको कभी उदास नहीं देख सकता... और ना ही कभी उसके आँखों में आँसू...देख सकता हूँ.. चाहे उसके लिए मुझे कुछ भी करना क्यों ना पड़े.... कुछ भी...
थोड़े देर ख़ामोशी के बाद....
विशम्भर - तुम्हारी मोहब्बत की दाद देता हूँ... अगर तुम शाहिल के घर वालों को राजी कर लो ... तो ...मैं भी शादी के लिए तैयार हूँ....
नेहा डैडी कहकर पिता से लिपट गई...
विशम्भर - जब एक आशिक इतनी बड़ी कुर्बानी दे सकता है तो मैं क्यों नहीं....
इधर शाहिल के घर वाले परेशान हो गए थे। राज के सचाई बताने से पहले ही सभी राज की पिटाई करने लगे.... लेकिन राज ने दर्द से उफ़ करने के बजाए दोनों की शादी की बात की। आखिर शाहिल के घर वालों ने हार मान ली। दोनों के शादी तय हो गई काड छप गए। लेकिन शादी के एक दिन पहले राज जाने की बात करने लगा जबकि उसे बहुत चोटें लगी थी…।शाहिल और नेहा उसे स्टेशन छोड़ने गए।
राज - आप दोनों पुरे धूम - धाम से शादी कर लेना....
शाहिल - तुम भी रुक जाते तो...
राज - मैं अपने आँखो के सामने अपने प्यार को किसी और का होते हुवे नहीं देख सकता... मेरी ट्रेन आ गई... जा रहा हूँ...इस जन्म तो तुम मेरी नहीं हुई लेकिन अगले जन्म में तुम मेरी होगी
नेहा - इतना प्यार करते हो मुझ से...
राज - जान से ज्यादा... आ...
नेहा - सम्भल के... दर्द हो रहा है...
राज - अरे ये छोटा सा जख़्म है ठीक हो जाएगा.... बाय... अपना ख्याल रखना...
नेहा - तुम भी...
नेहा राज के तरफ उदास नज़रो से देखती रही उसके पास शाहिल था... लेकिन फिर उसे ख़ुशी महशुस नहीं हो रही थी.... वो राज को एकटक जाते हुवे देख रही थी... ट्रेन सिटी देने लगी...
शाहिल - जाओ नेहा ... अपने प्यार के पास...
नेहा के आँखो में चमक दौड़ गई....
नेहा - और ...तुम
शाहिल - मैं जी लूंगा.... तुम्हारे बगैर... वो तुम्हे मुझ से भी ज्यादा खुश रखेगा जाओ नेहा जाओ...
इधर नेहा दौड़ी उधर गाड़ी चल पड़ी.... तभी राज ने बाहर झांका और नेहा को आता देख हाथ बढ़ाया...
नेहा - मुझे अकेला छोड़ कहा जा रहे थे...
राज - जा कहा रहा था ... अगले स्टेशन पर उतर जाता.…. अपनी जिंदगी को छोड़ कर कहा जा सकता हूँ। मेरी कहानी तुम्ही से शुरू और तुम्ही पर खत्म होती है।
फिर उस ट्रेन की छुक-छुक आवाज के साथ दोनों की खिलखिलाने की आवाज गूँजने लगती है।
जरूर बताएं आपको कहानी कैसी लगी। - आपका राज सिन्हा
Two leading filmmakers are rushing to the streaming platform with bio-series on Dawood Ibrahim. While Farhan Akhtar and Ritesh Sidhwani's Excel Entertainment’s series is based on investigative journalist author Hussain’s Dongri To Dubai , Ram Gopal’s Varma’s D Company is based entirely on his own research. Apparently, Excel’s excursion to Dawood’s territory began shooting before the pandemic. No information is available on its progress. I asked the author Hussain Zaidi and he said he had no idea of the progress on the project. Says Ram Gopal Varma, “I honestly don’t know what they are making. I read Dongri To Dubai which is very anecdotal in nature, like piecing together a number of crime columns published in newspapers. Also the subject matter of my series D Company is in the public domain. It’s the understanding and interpretation which will differ. Anyway may the best man win.” Incidentally these are not the only cinematic efforts on Dawood. Nikhil Advani made D Day whe...
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